Tuesday, 29 March 2016

मनुवादी ब्राह्मणों का क्रिकेट में कब्ज़ा करने की चाल... बचाओ ! बचाओ !


क्रिकेट की दुनिया में मनुवादी ब्राह्मणों ने पूरे विश्व में कब्ज़ा किया हुआ है। इन मनुवादी ब्राह्मणों की ऐसी की तैसी इनको हम भीम सैनिक मिलकर रोकेंगे और क्रिकेट में आरक्षण की मांग तेज करेंगे
ध्यान से देखिये...ये सचिन तेंदुलकर एक मराठी सारस्वत ब्राह्मण है । सभी रिकॉर्ड इसने अपने नाम बड़ी चालाकी से कर लिए । इसने 100 शतक लगा कर पूरी दुनिया में सबसे ऊँचा स्थान बनाया। इस मनुवादी सचिन ने हम भीम सैनिको को बेवकूफ बनाकर और शोषण करके 100 शतक लगाये है। बड़े बड़े गेंदबाज शोहेब अख्तर,शैन वार्न ,ग्लेन मेग्राथ, वसीम अकरम इत्यादि सभी इस मनुवादी ब्राह्मण सचिन से मिले हुए है। ये लोग सचिन को अच्छी अच्छी गेंद फेंकते थे ताकि सचिन खूब छक्के चौके मारे और शतक बनाये । शैन वार्न सचिन का चमचा है क्योंकि उसको सचिन सपने में आकर डराता है। इसीलिए अब सचिन जैसे मूलनिवासी ब्राह्मण की चाल को हम भीम सैनिक कामयाब नहीं होने देंगे। सचिन के 100 शतक दलित विरोधी है। शतक मारकर सचिन ने खुद को क्रिकेट का भगवान बना लिया ..ये इस मनुवादी ब्राह्मण सचिन की चाल है।।
रोहित शर्मा भी मनुवादी उत्तर भारतीय ब्राह्मण है। इसने 264 रन का सर्वोच्च रिकॉर्ड बनाकर हम भीम सैनिको पर बहुत जुल्म किया है। ये भी मनुवादी है और इसके 264 रन दलित विरोधी है और हम इन रनों का विरोध करते है। इस तरह के रिकॉर्ड ये मनुवादी ब्राह्मण जानबूझकर बनाते है ताकि हम भीम सैनिक आगे न बढ़ सके। इसके रिकॉर्ड के खिलाफ हम आंदोलन करेंगे।
सौरव गांगुली ...ये भी मनुवादी बंगाली ब्राह्मण है।। इसी के कारण भारतीय टीम दूसरी बार क्रिकेट विश्वकप के फाइनल में पहुंची थी।और इसने कई वर्षो तक क्रिकेट कप्तान पद पर कब्ज़ा किया हुआ था।
चेतन शर्मा नाम का मनुवादी ब्राह्मण पहला भारतीय तेज गेंदबाज था जिसने क्रिकेट में हैट्रिक मारी थी।। ये हैट्रिक भीम बाबा की विरोधी थी।।यहाँ भी इन ब्राह्मणों ने सारे रिकॉर्ड खुद के नाम पेटेंट करा लिए।
इनके अलावा विराट कोहली,राहुल द्रविड़,आर अश्विन,रवि शास्त्री,इशांत शर्मा,श्रीसंत इत्यादि मनुवादी ब्राह्मणों ने क्रिकेट में कब्ज़ा किया हुआ है। विराट कोहली तो सचिन के रिकॉर्ड को तोड़ भी सकता है। इसके कारण भीम सैनीक आगे नहीं बढ़ पा रहे। काश क्रिकेट में भी आरक्षण होता तो एक भी सचिन या रोहित शर्मा या विराट कोहली पैदा न होता। विराट तो अब कप्तान बनने वाला है इंडियन क्रिकेट टीम का।।
हम सभी मलनिवासी अब क्रिकेट में भी आरक्षण की मांग करेंगे ताकि क्रिकेट से मनुवादी ब्राह्मणों का वर्चस्व समाप्त हो सके। बहुत हुआ भीम सैनिको पर अत्याचार.....क्या क्रिकेट में हमारा हक़ नहीं?? क्या गेंदबाज सिर्फ इन ब्राह्मणों को ही अच्छी गेंद फेंकेंगे?? क्या हमें 100 सेंचुरी बनाने का हक़ नहीं....सदियो से भीम सैनिको पर जुल्म हुआ अब और नहीं। अब क्रिकेट में भी आरक्षण चाहिए हमें ताकि क्रिकेट से ब्राह्मणवाद ख़त्म हो सके।

एक भारत नेक भारत हमारा संकल्प

Saturday, 5 March 2016

एक आम भारतीय करदाता का खुला पत्र JNU के अध्यक्ष कन्हैया कुमार के नाम


कन्हैया कुमार ji

आपका भाषण सुना जो आपने जेल से वापस आ कर दिया, सुना कि आपको ग़रीबी, भुखमरी, जातिवाद, साम्राज्यवाद और पूँजीवाद से आज़ादी चाहिये। मेरे विचार मे, इन सबसे आजादी पाने के लिए मन लगाकर पढाई करें, खूब मेहनत करें, कैरियर बनायें और आगे बढ़ें तो अपने आप मिल जायेगी आजादी और अापके साथी जो नारे लगा रहे हैं उनको भी ये समझायें। आपका भाषण तो अच्छा था लेकिन मैं आपकी बातों में लाजिक ढूँढ़ने की कोशिश कर रही थी, इसके लिये मेरे दो चार सवाल है ज़वाब देने की मेहरबानी करें

1- आपका भाषण तो पूरा राजनैतिक था, तो ये पढ़ाई का ढोंग क्यों?? बाहर आईये और राजनीति में करियर चमकाईये और अपनी जगह किसी उपयुक्त छात्र को दीजिये जो पढ़ाई के नाम पर राजनीति न करे। पढ़ाई के नाम पर ये मुफ़्तख़ोरी बंद करिये, आपके राजनैतिक करियर पर टैक्स पेयर जनता का पैसा बर्बाद क्यों हो??

2- ग़रीबी, भुखमरी, जातिवाद, साम्राज्यवाद और पूँजीवाद ... लेकिन ये नही बताया ये समस्या कब से है ? और इसके असली जिम्मेदार कौन है ?? ज़रा बतायेंगे ये सारी समस्यायें कब से हैं ?? या ये सिर्फ पिछले 18 महीने मे खड़ी हुई हैं ?? जो पार्टी 60 सालों से राज कर रही थी उसकी जवाबदारी कितनी मानते है या उनके शासन में रामराज्य था ??आप प्रधानमंत्री की सूट पकड़ कर उनसे प्रश्न पूछना चाहते हैं तो सोनिया गांधी की साड़ी पकड़ कर उनसे प्रश्न क्यों नही पूछते??

3- आपके बताया नहीं कि ग़रीबी, भुखमरी, जातिवाद, साम्राज्यवाद और पूँजीवाद को कैसे हटायेंगे और इसका ब्लूप्रिंट क्या है या सिर्फ़ नारों से हट जायेगी ?? आज सारी दुनिया मे वामपंथ फ़ेल हो चुका है तो ये भारत में किस तरह से सफल होगा ??

4- आपकी पार्टी की सरकार पश्चिम बंगाल मे 35 साल तक थी, आप बतायेंगे कितनी ग़रीबी, भुखमरी या जातिवाद दूर हो गया?? आँकड़े तो इसका उल्टा ही बताते हैं तो हम क्यो विश्वास करें आपका??

 5- अगर भारत के संिवधान या लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करते हैं तो जनता के बीच जाकर, चुनाव लड़कर ईमानदारी से सिस्टम मे सुधार करते और ग़रीबी भुखमरी के खिलाफ लड़ते न कि जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के खिलाफ ज़हर उगलते

6. आपको पुलिसवाला अपने जैसा ही इंसान लगा अच्छी बात है पर बतायेंगे जिन पुलिसवालों को दंतेवाड़ा में आपके साथियों(DSU) ने मारा वो अपने जैसे लगते थे या नही ?? जिनकी मौत पर JNU में जश्न मनाया जाता है वो भी ग़रीब परिवार के ही थे जिन्हें लाल सलाम वालों ने मारा है

7- आपको फ़ौजी भी अपने जैसे लगते हैं ना, तो आपके साथ कंधे से कंधा मिला कर जो नारे देते हैं 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' कभी सोचा है उनके उपर क्या गुज़रती होगी ?? उनका मोराल कितना डाउन होता होगा ?? कभी सोचा है एक भारतीय की आत्मा तड़पती है जब JNU के ये नारे सुनते हैं "भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी" आपको भी यही लगता तो आप कहीं विरोध दर्ज करते ना

8- आप कहते है कि इस देश के क़ानून पर आपको भरोसा है तो कैसे आपके साथी तो आपके सामने ही नारा देते हैं ?? "अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं, तेरे क़ातिल ज़िंदा हैंंंं', "कितने अफ़ज़ल मारोगे, घर घर से अफ़ज़ल निकलेगा",
पुलिस वालों से आपको सहानुभूति है ना, कितने पुलिसवाले संसद में हुए हमले में कितने मरे मालूम है या दिल में अफ़ज़ल से आधी भी सहानुभूति है ?? ये भारत की सर्वोच्च न्यायालय का ही तो फ़ैसला था फिर ये आपका ढोंग नहीं है तो और क्या है ??

9- रोहित वेमुला जिसका SFI से मोहभंग हो चुका था उसका येचुरी के बारे में लिखा ख़त/विचार क्यो नहीं बताया?? क्योंकि वो आपकी विचारधारा को सपोर्ट नहीं करता ??मरने वाला इंसान कभी झूठ नहीं बोलता और dying declaration तो कोर्ट भी मानता है, जब रोहित ने आख़िरी ख़त में किसी को भी ज़िम्मेदार नहीं बताया पर आप किसी न किसी तरह से इसका भी राजनैतिक फ़ायदा उठाना चाहते है तभी तो ये मुद्दा बार बार उठाते हैं

 आपकी असली समस्या है एबीवीपी, आरएसएस, बीजेपी और मोदी जिनसे आज़ादी चाहिये, आपको लोकतांत्रिक ढंग से चुनी सरकार नहीं चाहिये क्योंकि आपको पंसद नही, उसके जाने के बाद सब आज़ादी मिल जायेगी। भाषण की जगह बस एकबार अपना ही जजमेंट ही पढ़ कर सुना देते छात्रों के सामने, ख़ुद पर शर्म आ जायेगी और सारी ग़लतफ़हमी दूर हो जायेगी

एक आम भारतीय