Friday, 23 December 2016

देश में 'सपने' दिखाने व 'तू-तू मैं-मैं' की राजनीति से ज़्यादा और कुछ नहीं ।


सपने देखना व दिखाना कोई बुरी बात नहीं परंतु यह सच तो नहीं कि सभी सपने सच्चे ही निकलें। सपने अक्सर वास्तविकता से परे ही होते हैं। मार्केटिंग का ज़माना है अतः पहले सपने दिखाओ और फिर बड़ा पैसा ख़र्च कर उसका प्रचार भी ख़ूब बड़ा करो, तो राजनीति में आज कल काम चल जाता है। सिद्धांत व प्रतिभा की बात तो बेमानी हो गयी है।
लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दल यही सपने दिखा रहे हैं, कोई छोटे पैमाने पर और कोई बड़े पैमाने पर। देश में ग़रीबी व बेरोज़गारी से पार नहीं पाया जा रहा है। संसद व विधान सभाओं में 'तू-तू मैं-मैं' और भद्दी नोकझोंक को जनता ठगी सी देखती रहती है। विकास की बड़ी-२ बातें सभी दल करते हैं लेकिन विकास के नाम पर वादे ही अधिक होते है। यदि कुछ विकास हो भी रहा है वह 'सांकेतिक' अर्थात दिखावा मात्र ही अधिक है।
कोई 'चेहरों' की राजनीति कर रहा है तो कोई 'जाति व धर्म' के नाम पर ठगी कर रहा है। अब महापुरुषों के नाम पर भी राजनीति हो रही है, उन्हें भी जाति व राजनीतिक दलों में बाँट दिया गया है। अपनी बात के समर्थन में कुछ उद्धरण प्रस्तुत कर रहा हूँ:
राष्ट्रीय पार्टियों में भाजपा व कोंग्रेस दो ही प्रमुख दल हैं। भाजपा में यदि मोदी जी के चेहरे को आज अलग कर दिया जाए तो भाजपा में आज शायद नेतृत्वहीनता की स्थिति पैदा हो जाए। कुछ को छोड़ अधिकांश प्रदेशों में प्रदेश स्तरीय चमकदार/सर्वमान्य चेहरों का अभाव है। उत्तर प्रदेश में भी मोदी जी ही चेहरा हैं।
कोंग्रेस में गांधी परिवार को अलग कर दें तो लगता है कि कोई नेतृत्व है ही नहीं और न ही कभी गांधी परिवार से बाहर नेतृत्व विकसित होने दिया गया या फिर कोई नेतृत्व का दावा ठोकने का साहस ही कर पाया। पारिवारिक गुलामीयत की स्थिति है।
उत्तर प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में सपा व बसपा में तो जो हाल है वह किसी से छुपा नहीं है। सपा एक परिवार व जाति की पार्टी है तो बसपा एक नेता व जाति के आस पास ही घूमती है। भ्रष्टाचार या अन्य विषयों पर जितनी भी बात करें, इन दोनो के विषय में कम ही लगेगी।
उपरोक्त सभी दलों ने उत्तर प्रदेश में कभी न कभी राज किया है और सबके अपने-२ वादे व दावे किए हैं। कुछ सही परंतु अधिकांश  ग़लत या झूँटे ही साबित हुए हैं।
उपेक्षित अयोध्या को ही देखें, सभी ने ठगा राम की इस नगरी को। बातें व वादे आज भी हो रहे हैं और पहले भी ख़ूब हुए। न मंदिर बना और न यहाँ विकास, झूँटे ख़ाली सपने ही दिखाए गए और लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हुआ, यहाँ।
नोटबंदी का मुद्दा आज सामयिक है और जैसे सपने आज दिखाए जा रहे हैं और लोग आँख बंद कर विश्वास भी कर रहे हैं, आशा है कि सब नहीं तो कुछ तो इस बार पूरे होंगे। नोटबंदी से ग़रीबों का कुछ भला होगा और रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे लेकिन कैसे होगा यह सब, भविष्य के गर्त में ही छुपा है.... कोई प्लान तो अभी दिखाई नहीं देता लेकिन सपने तो बड़े-२ दिखाए जा रहे हैं। पक्ष-विपक्ष में 'तू-तू मैं-मैं' भी ख़ूब हो रही है।
इस 'झूँटे सपने दिखाने' व ' तू-तू मैं-मैं' की राजनीति में यदि कोई ठगा जाता है तो जनता, कोई यदि जीतता है तो झूँठा नेता व गंदी राजनीति और कोई यही पराजित होता है तो जन-मानस का लोकतंत्र.... बाक़ी और कुछ मेरी समझ में नहीं आता... मैं कोई बुद्धिजीवी तो हूँ नहीं, मेरी  छोटी बुद्धि में इस चुनाव के मौसम में जो आया लिख दिया।
किसी को कुछ बुरा लगे तो माफ़ करना.... अंध-भक्ति का ज़माना है.... सच्चाई सबको पसंद नहीं .... लोग वही सुनना व देखना चाहते हैं, जिसे वे सही मानते हैं चाहे वह विवेकपूर्ण व तर्कसंगत हो अथवा नहीं  !!
जय हिंद .

Thursday, 30 June 2016

सांतवे वेतन आयोग के हिसाब से वेतन देकर कोई अहसान नहीं कर रही सरकार !



जब भी सरकारी कर्मचारियों के वेतन बढ़ने की बात होती है उन्हें हिक़ारत की निगाह से देखा जाने लगता है। जैसे सरकार काम न करने वालों का कोई समूह हो। सुझाव दिया जाने लगता है कि इनकी संख्या सीमित हो और वेतन कम बढ़े। आलसी, जाहिल से लेकर मक्कार तक की छवि बनाई जाती है और इसके बीच वेतन बढ़ाने की घोषणा किसी अर्थ क्रांति के आगमन के रूप में भी की जाने लगती है। कर्मचारी तमाम विश्लेषणों के अगले पैरे में सुस्त पड़ती भारत की महान अर्थव्यवस्था में जान लेने वाले एजेंट बन जाते हैं।

पहले भी यही हो रहा था।आज भी यही हो रहा है। एक तरफ सरकारी नौकरी के लिए सारा देश मरा जा रहा है। दूसरी तरफ उसी सरकारी नौकरों के वेतन बढने पर देश को मरने के लिए कहा जा रहा है। क्या सरकारी नौकरों को बोतल में बंद कर दिया जाए और कह दिया जाए कि तुम बिना हवा के जी सकते हो क्योंकि तुम जनता के दिए टैक्स पर बोझ हो। यह बात वैसी है कि सरकारी नौकरी में सिर्फ कामचोरों की जमात पलती है लेकिन भाई ‘टेल मी अनेस्टली’ क्या कारपोरेट के आँगन में कामचोर डेस्क टॉप के पीछे नहीं छिपे होते हैं?

अगर नौकरशाही चोरों,कामचोरों की जमात है तो फिर इस देश के तमाम मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री से पूछा जाना चाहिए कि डियर आप कैसे कह रहे हैं कि आपकी सरकार काम करती है। इस बात को कहने के लिए ही आप करोड़ों रुपये विज्ञापनबाज़ी में क्यों फूँक रहे हैं। आपके साथ कोई तो काम करता होगा तभी तो नतीजे आते हैं। अगर कोई काम नहीं कर रहा तो ये आप देखिये कि क्यों ऐसा है। बाहर आकर बताइये कि तमाम मंत्रालयों के चपरासी से लेकर अफसर तक समय पर आते हैं और काम करते हैं। इसका दावा तो आप लोग ही करते हैं न। तो क्यों नहीं भोंपू लेकर बताते हैं कि नौकरशाही का एक बड़ा हिस्सा आठ घंटे से ज़्यादा काम करता है। पुलिस से लेकर कई महकमे के लोग चौदह पंद्रह घंटे काम करते हैं।

सरकार से बाहर के लोग सरकार की साइज़ को लेकर बहुत चिन्तित रहते हैं। कर्मचारी भारी बोझ हैं तो डियर सबको हटा दो। सिर्फ पी एम ओ में पी एम रख दो और सी एम ओ में सीएम सबका काम हो जाएगा। जनता का दिया सारा टैक्स बच जाएगा। पिछले बीस सालों से ये बकवास सुन रहा हूँ। कितनी नौकरियाँ सरकार निकाल रही है पहले ये बताइये। क्या ये तथ्य नहीं है कि सरकारी नौकरियों की संख्या घटी है? इसका असर काम पर पड़ता होगा कि नहीं। तमाम सरकारी विभागों में लोग ठेके पर रखे जा रहे हैं। ठेके के टीचर तमाम राज्यों में लाठी खा रहे हैं। क्या इनका भी वेतन बढ़ रहा है? नौकरियाँ घटाने के बाद कर्मचारियों और अफ़सरों पर कितना दबाव बढ़ा है क्या हम जानते हैं। लोगों को ठेके पर रख कर आधा वेतन देकर सरकार कितने लाख करोड़ बचा रही है, क्या कभी ये जोड़ा गया है?

इसके साथ साथ वित्त विश्लेषक लिखने लगता है कि प्राइवेट सेक्टर में नर्स को जो मिलता है उससे ज़्यादा सरकार अपने नर्स को दे रही है। जनाब शिक्षित विश्लेषक पता तो कीजिए कि प्राइवेट अस्पतालों में नर्सों की नौकरी की क्या शर्तें हैं। उन्हें क्यों कम वेतन दिया जा रहा है। उनकी कितनी हालत ख़राब है। अगर आप कम वेतन के समर्थक हैं तो अपनी सैलरी भी चौथाई कर दीजिये और बाकी को कहिए कि राष्ट्रवाद से पेट भर जाता है सैलरी की क्या ज़रूरत है। कारपोरेट में सही है कि सैलरी ज्यादा है लेकिन क्या सभी को लाखों रुपये पगार के मिल रहे हैं? नौकरी नहीं देंगे तो भाई बेरोज़गारी प्रमोट होगी कि नहीं। सरकार का दायित्व बनता है कि सुरक्षित नौकरी दे और अपने नागरिकों का बोझ उठाये। उसे इसमें दिक्कत है तो बोझ को छोड़े और जाये।

नौकरशाही में कोई काम नहीं कर रहा है तो ये सिस्टम की समस्या है। इसका सैलरी से क्या लेना देना। उसके ऊपर बैठा नेता है जो डीएम तक से पैसे वसूल कर लाने के लिए कहता है। जो लूट के हर तंत्र में शामिल है और आज भी हर राज्य में शामिल है। नहीं तो आप पिछले चार चुनावों में हुए खर्चे का अनुमान लगा कर देखिये। इनके पास कहाँ से इतना पैसा आ रहा है? वो भी सिर्फ फूँकने के लिए। ज़ाहिर है एक हिस्सा तंत्र को कामचोर बनाता है ताकि लूट कर राजनीति में फूँक सके। मगर एक हिस्सा काम भी तो करता है। हमारी चोर राजनीति इस सिस्टम को सड़ा कर रखती है, भ्रष्ट लोगों को शह देती है और उकसा कर रखती है। इसका संबंध उसके वेतन से नहीं है।

रहा सवाल कि अर्थव्यवस्था में जान फूँकने के लिए सरकारी कर्मचारियों का ही वेतन क्यों बढ़ाया जा रहा है। एक लाख करोड़ से किसानों के कर्ज़े माफ हो सकते थे। उनके अनाजों के दाम बढ़ाये जा सकते थे। किसान के हाथ में पैसा आएगा तो क्या भारत की महान अर्थव्यवस्था अँगड़ाई लेने से इंकार कर देगी? ये विश्लेषक चाहते क्या है? सरकार सरकारी कर्मचारी के सैलरी न बढ़ाये, किसानों और छात्रों के कर्ज़ माफ न करे, खरीद मूल्य न बढ़ाये तो उस पैसे का क्या करे सरकार? पाँच लाख करोड़ की ऋण छूट दी तो है उद्योगपतियों को। कारपोरेट इतना ही कार्यकुशल है तो जनता के पैसे से चलने वाले सरकारी बैंकों के लाखों करोड़ क्यों पचा जाता है। कारपोरेट इतना ही कार्यकुशल है तो क्यों सरकार से मदद माँगता है। अर्थव्यवस्था को दौड़ा कर दिखा दे न।

इसलिए इस वेतन वृद्धि को तर्क और तथ्य बुद्धि से देखिये। धारणाओं के कुचक्र से कोई लाभ नहीं है। प्राइवेट हो या सरकारी हर तरह की नौकरियों में काम करने की औसत उम्र कम हो रही है। सुरक्षा घट रही है। इसका नागरिकों के सामाजिक जीवन से लेकर सेहत तक पर बुरा असर पड़ता है। लोग तनाव में ही दिखते हैं। उपभोग करने वाला वर्ग योग से तैयार नहीं होगा। काम करने के अवसर और उचित मज़दूरी से ही उसकी क्षमता बढ़ेगी ।

Sunday, 22 May 2016

अाज की राजनीति पर एक सकारात्मक व्यंग।



जिसके हम मामा है

एक सज्जन बनारस पहुँचे। स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता आया।

'मामाजी! मामाजी!' - लड़के ने लपक कर चरण छूए।

वे पहताने नहीं। बोले - 'तुम कौन?'

'मैं मुन्ना। आप पहचाने नहीं मुझे?'

'मुन्ना?' वे सोचने लगे।

'हाँ, मुन्ना। भूल गए आप मामाजी! खैर, कोई बात नहीं, इतने साल भी तो हो गए।'

'तुम यहाँ कैसे?'

'मैं आजकल यहीं हूँ।'

'अच्छा।'

'हाँ।'

मामाजी अपने भानजे के साथ बनारस घूमने लगे। चलो, कोई साथ तो मिला। कभी इस मंदिर, कभी उस मंदिर।

फिर पहुँचे गंगाघाट। सोचा, नहा लें।

'मुन्ना, नहा लें?'

'जरूर नहाइए मामाजी! बनारस आए हैं और नहाएँगे नहीं, यह कैसे हो सकता है?'

मामाजी ने गंगा में डुबकी लगाई। हर-हर गंगे।

बाहर निकले तो सामान गायब, कपड़े गायब! लड़का... मुन्ना भी गायब!

'मुन्ना... ए मुन्ना!'

मगर मुन्ना वहाँ हो तो मिले। वे तौलिया लपेट कर खड़े हैं।

'क्यों भाई साहब, आपने मुन्ना को देखा है?'

'कौन मुन्ना?'

'वही जिसके हम मामा हैं।'

'मैं समझा नहीं।'

'अरे, हम जिसके मामा हैं वो मुन्ना।'

वे तौलिया लपेटे यहाँ से वहाँ दौड़ते रहे। मुन्ना नहीं मिला।

भारतीय नागरिक और भारतीय वोटर के नाते हमारी यही स्थिति है मित्रो! चुनाव के मौसम में कोई आता है और हमारे चरणों में गिर जाता है। मुझे नहीं पहचाना मैं चुनाव का उम्मीदवार। होनेवाला एम.पी.। मुझे नहीं पहचाना? आप प्रजातंत्र की गंगा में डुबकी लगाते हैं। बाहर निकलने पर आप देखते हैं कि वह शख्स जो कल आपके चरण छूता था, आपका वोट लेकर गायब हो गया। वोटों की पूरी पेटी लेकर भाग गया।

समस्याओं के घाट पर हम तौलिया लपेटे खड़े हैं। सबसे पूछ रहे हैं - क्यों साहब, वह कहीं आपको नजर आया? अरे वही, जिसके हम वोटर हैं। वही, जिसके हम मामा हैं।

पाँच साल इसी तरह तौलिया लपेटे, घाट पर खड़े बीत जाते हैं।

Tuesday, 5 April 2016

पूरे भारत में सर्राफा कारोबारियों ने जो चक्का जाम किया है उसके पीछे का राज :-



कभी पता होगा या हिंदी फिल्मों में देखा होगा सोने की तस्करी जिसमे बाहर से आने वाले सोने पर टैक्स बचाने हेतु बॉम्बे के डॉक यार्ड पर लूट या चोरी होती थी । बहुत सा सोना कस्टम विभाग के हाथ लगता था जो कि सरकारी खजाने में जाता था जिसका विसर्जन कांग्रेस के द्वारा 1993 में कर्ज उठाने के वक्त कर दिया गया था जो कि आज तक वापस नहीं आया।
उसी प्रकार सर्राफ धड्ड्ले से बिना पक्की रसीद के करोड़ो का सोना बेचते आ रहे थे और खरीदने के साथ साथ बेचने वाला टैक्स बचाकर मस्त रहता था ।
लेकिन जब टैक्स की चोरी पर आज की सरकार द्वारा कदम उठाया गया कि 2 लाख का सोना खरीदने वाले को बस पैन कार्ड दिखाना होगा तो सर्राफ समझ गए कि अब खरीदेंगे क्या और बेचेंगे क्या ?
अब जो तस्करी खुले आम हो रही थी जो कि पहले बॉम्बे डॉक्स पर चुप चाप होती थी वो तो रुक गई ।
ये हाल है अगर कोई अच्छा करे हिन्दुस्तान में तो वो भी बदनाम और बुरा करने वाला तो विरोध में खड़ा हो ही जाता है अच्छा करने वालों के।
अगर किसी के काम की आलोचना कर सकते हो तो उसे सराहना भी सीखो।
मैं जेटली जी के इस कदम का स्वागत करता हूँ बाकी सर्राफ समझ जाएं मीडिया भारत माता की जय के चक्कर में आपकी आवाज दबा दी और विरोधियों को सर्राफीयों को डिफेंड करने का कोई रास्ता भी नहीं सूझ रहा है।
नायक मूवी की तरह अगले 3 साल टैक्स पूरा दो , मत बचाओ आने वाले समय में वही आपको आपका विकास दिखाएगा।
बाकी मोदी सरकार से एक गुहार कि सोने पर सब्सिडी न स्टार्ट कर देना ।
और हाँ जो मोदी को सिर्फ फेंकू कहते है उनसे ये कहता हूँ .....भई इस तरह कोई भी फेंके मुझे कोई आपत्ति नहीं  .....काश कोई और भी इस तरह की चीजें  फेंके .....

Tuesday, 29 March 2016

मनुवादी ब्राह्मणों का क्रिकेट में कब्ज़ा करने की चाल... बचाओ ! बचाओ !


क्रिकेट की दुनिया में मनुवादी ब्राह्मणों ने पूरे विश्व में कब्ज़ा किया हुआ है। इन मनुवादी ब्राह्मणों की ऐसी की तैसी इनको हम भीम सैनिक मिलकर रोकेंगे और क्रिकेट में आरक्षण की मांग तेज करेंगे
ध्यान से देखिये...ये सचिन तेंदुलकर एक मराठी सारस्वत ब्राह्मण है । सभी रिकॉर्ड इसने अपने नाम बड़ी चालाकी से कर लिए । इसने 100 शतक लगा कर पूरी दुनिया में सबसे ऊँचा स्थान बनाया। इस मनुवादी सचिन ने हम भीम सैनिको को बेवकूफ बनाकर और शोषण करके 100 शतक लगाये है। बड़े बड़े गेंदबाज शोहेब अख्तर,शैन वार्न ,ग्लेन मेग्राथ, वसीम अकरम इत्यादि सभी इस मनुवादी ब्राह्मण सचिन से मिले हुए है। ये लोग सचिन को अच्छी अच्छी गेंद फेंकते थे ताकि सचिन खूब छक्के चौके मारे और शतक बनाये । शैन वार्न सचिन का चमचा है क्योंकि उसको सचिन सपने में आकर डराता है। इसीलिए अब सचिन जैसे मूलनिवासी ब्राह्मण की चाल को हम भीम सैनिक कामयाब नहीं होने देंगे। सचिन के 100 शतक दलित विरोधी है। शतक मारकर सचिन ने खुद को क्रिकेट का भगवान बना लिया ..ये इस मनुवादी ब्राह्मण सचिन की चाल है।।
रोहित शर्मा भी मनुवादी उत्तर भारतीय ब्राह्मण है। इसने 264 रन का सर्वोच्च रिकॉर्ड बनाकर हम भीम सैनिको पर बहुत जुल्म किया है। ये भी मनुवादी है और इसके 264 रन दलित विरोधी है और हम इन रनों का विरोध करते है। इस तरह के रिकॉर्ड ये मनुवादी ब्राह्मण जानबूझकर बनाते है ताकि हम भीम सैनिक आगे न बढ़ सके। इसके रिकॉर्ड के खिलाफ हम आंदोलन करेंगे।
सौरव गांगुली ...ये भी मनुवादी बंगाली ब्राह्मण है।। इसी के कारण भारतीय टीम दूसरी बार क्रिकेट विश्वकप के फाइनल में पहुंची थी।और इसने कई वर्षो तक क्रिकेट कप्तान पद पर कब्ज़ा किया हुआ था।
चेतन शर्मा नाम का मनुवादी ब्राह्मण पहला भारतीय तेज गेंदबाज था जिसने क्रिकेट में हैट्रिक मारी थी।। ये हैट्रिक भीम बाबा की विरोधी थी।।यहाँ भी इन ब्राह्मणों ने सारे रिकॉर्ड खुद के नाम पेटेंट करा लिए।
इनके अलावा विराट कोहली,राहुल द्रविड़,आर अश्विन,रवि शास्त्री,इशांत शर्मा,श्रीसंत इत्यादि मनुवादी ब्राह्मणों ने क्रिकेट में कब्ज़ा किया हुआ है। विराट कोहली तो सचिन के रिकॉर्ड को तोड़ भी सकता है। इसके कारण भीम सैनीक आगे नहीं बढ़ पा रहे। काश क्रिकेट में भी आरक्षण होता तो एक भी सचिन या रोहित शर्मा या विराट कोहली पैदा न होता। विराट तो अब कप्तान बनने वाला है इंडियन क्रिकेट टीम का।।
हम सभी मलनिवासी अब क्रिकेट में भी आरक्षण की मांग करेंगे ताकि क्रिकेट से मनुवादी ब्राह्मणों का वर्चस्व समाप्त हो सके। बहुत हुआ भीम सैनिको पर अत्याचार.....क्या क्रिकेट में हमारा हक़ नहीं?? क्या गेंदबाज सिर्फ इन ब्राह्मणों को ही अच्छी गेंद फेंकेंगे?? क्या हमें 100 सेंचुरी बनाने का हक़ नहीं....सदियो से भीम सैनिको पर जुल्म हुआ अब और नहीं। अब क्रिकेट में भी आरक्षण चाहिए हमें ताकि क्रिकेट से ब्राह्मणवाद ख़त्म हो सके।

एक भारत नेक भारत हमारा संकल्प

Saturday, 5 March 2016

एक आम भारतीय करदाता का खुला पत्र JNU के अध्यक्ष कन्हैया कुमार के नाम


कन्हैया कुमार ji

आपका भाषण सुना जो आपने जेल से वापस आ कर दिया, सुना कि आपको ग़रीबी, भुखमरी, जातिवाद, साम्राज्यवाद और पूँजीवाद से आज़ादी चाहिये। मेरे विचार मे, इन सबसे आजादी पाने के लिए मन लगाकर पढाई करें, खूब मेहनत करें, कैरियर बनायें और आगे बढ़ें तो अपने आप मिल जायेगी आजादी और अापके साथी जो नारे लगा रहे हैं उनको भी ये समझायें। आपका भाषण तो अच्छा था लेकिन मैं आपकी बातों में लाजिक ढूँढ़ने की कोशिश कर रही थी, इसके लिये मेरे दो चार सवाल है ज़वाब देने की मेहरबानी करें

1- आपका भाषण तो पूरा राजनैतिक था, तो ये पढ़ाई का ढोंग क्यों?? बाहर आईये और राजनीति में करियर चमकाईये और अपनी जगह किसी उपयुक्त छात्र को दीजिये जो पढ़ाई के नाम पर राजनीति न करे। पढ़ाई के नाम पर ये मुफ़्तख़ोरी बंद करिये, आपके राजनैतिक करियर पर टैक्स पेयर जनता का पैसा बर्बाद क्यों हो??

2- ग़रीबी, भुखमरी, जातिवाद, साम्राज्यवाद और पूँजीवाद ... लेकिन ये नही बताया ये समस्या कब से है ? और इसके असली जिम्मेदार कौन है ?? ज़रा बतायेंगे ये सारी समस्यायें कब से हैं ?? या ये सिर्फ पिछले 18 महीने मे खड़ी हुई हैं ?? जो पार्टी 60 सालों से राज कर रही थी उसकी जवाबदारी कितनी मानते है या उनके शासन में रामराज्य था ??आप प्रधानमंत्री की सूट पकड़ कर उनसे प्रश्न पूछना चाहते हैं तो सोनिया गांधी की साड़ी पकड़ कर उनसे प्रश्न क्यों नही पूछते??

3- आपके बताया नहीं कि ग़रीबी, भुखमरी, जातिवाद, साम्राज्यवाद और पूँजीवाद को कैसे हटायेंगे और इसका ब्लूप्रिंट क्या है या सिर्फ़ नारों से हट जायेगी ?? आज सारी दुनिया मे वामपंथ फ़ेल हो चुका है तो ये भारत में किस तरह से सफल होगा ??

4- आपकी पार्टी की सरकार पश्चिम बंगाल मे 35 साल तक थी, आप बतायेंगे कितनी ग़रीबी, भुखमरी या जातिवाद दूर हो गया?? आँकड़े तो इसका उल्टा ही बताते हैं तो हम क्यो विश्वास करें आपका??

 5- अगर भारत के संिवधान या लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करते हैं तो जनता के बीच जाकर, चुनाव लड़कर ईमानदारी से सिस्टम मे सुधार करते और ग़रीबी भुखमरी के खिलाफ लड़ते न कि जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के खिलाफ ज़हर उगलते

6. आपको पुलिसवाला अपने जैसा ही इंसान लगा अच्छी बात है पर बतायेंगे जिन पुलिसवालों को दंतेवाड़ा में आपके साथियों(DSU) ने मारा वो अपने जैसे लगते थे या नही ?? जिनकी मौत पर JNU में जश्न मनाया जाता है वो भी ग़रीब परिवार के ही थे जिन्हें लाल सलाम वालों ने मारा है

7- आपको फ़ौजी भी अपने जैसे लगते हैं ना, तो आपके साथ कंधे से कंधा मिला कर जो नारे देते हैं 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' कभी सोचा है उनके उपर क्या गुज़रती होगी ?? उनका मोराल कितना डाउन होता होगा ?? कभी सोचा है एक भारतीय की आत्मा तड़पती है जब JNU के ये नारे सुनते हैं "भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी" आपको भी यही लगता तो आप कहीं विरोध दर्ज करते ना

8- आप कहते है कि इस देश के क़ानून पर आपको भरोसा है तो कैसे आपके साथी तो आपके सामने ही नारा देते हैं ?? "अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं, तेरे क़ातिल ज़िंदा हैंंंं', "कितने अफ़ज़ल मारोगे, घर घर से अफ़ज़ल निकलेगा",
पुलिस वालों से आपको सहानुभूति है ना, कितने पुलिसवाले संसद में हुए हमले में कितने मरे मालूम है या दिल में अफ़ज़ल से आधी भी सहानुभूति है ?? ये भारत की सर्वोच्च न्यायालय का ही तो फ़ैसला था फिर ये आपका ढोंग नहीं है तो और क्या है ??

9- रोहित वेमुला जिसका SFI से मोहभंग हो चुका था उसका येचुरी के बारे में लिखा ख़त/विचार क्यो नहीं बताया?? क्योंकि वो आपकी विचारधारा को सपोर्ट नहीं करता ??मरने वाला इंसान कभी झूठ नहीं बोलता और dying declaration तो कोर्ट भी मानता है, जब रोहित ने आख़िरी ख़त में किसी को भी ज़िम्मेदार नहीं बताया पर आप किसी न किसी तरह से इसका भी राजनैतिक फ़ायदा उठाना चाहते है तभी तो ये मुद्दा बार बार उठाते हैं

 आपकी असली समस्या है एबीवीपी, आरएसएस, बीजेपी और मोदी जिनसे आज़ादी चाहिये, आपको लोकतांत्रिक ढंग से चुनी सरकार नहीं चाहिये क्योंकि आपको पंसद नही, उसके जाने के बाद सब आज़ादी मिल जायेगी। भाषण की जगह बस एकबार अपना ही जजमेंट ही पढ़ कर सुना देते छात्रों के सामने, ख़ुद पर शर्म आ जायेगी और सारी ग़लतफ़हमी दूर हो जायेगी

एक आम भारतीय 

Sunday, 3 January 2016

ISC 12th Computer project January 3 2016 The solution of five questions are giving here .first two questions have solution along with Algorithm

ISC 12th Computer project

January 3
2016
The solution of five questions are giving here .first two questions have solution along with Algorithm  
@ shuklasanjeev15@gmail.com




Question :
A bank intends to design a program to display the denomination of an input amount, upto 5 digits. The available denomination with the bank are of rupees 1000, 500, 100, 50, 20, 10 ,5, 2 and 1.

Design a program to accept the amount from the user and display the break-up in descending order of denominations. (i,e preference should be given to the highest denomination available) along with the total number of notes. [Note: only the denomination used should be displayed]. Also print the amount in words according to the digits.

Example 1:

INPUT: 14836

OUTPUT: ONE FOUR EIGHT THREE SIX
DENOMINATION:
1000 X 14 =14000
500 X 1 =500
100 X 3 =300
50 X 1 =50
5 X 1 =5
1 X 1 =1




Algorithm
Step-1: Enter the amount in n
Step-2: Store the basic denominations (1000, 500, 100, 50, 20, 10, 5, 2, 1)  in an array
Step-3: Run a loop to access the array
Step-4: Divide the amount n by each value in the array to get the quotient
Step-5: If the quotient is not zero, display the denomination and update amount.
Step-6: To display the denomination digits in words, create an array and store the digits in
 words
Step-7: Now run a while loop to reverse the original number.
Step-8: Run another loop and extract each digit of the reversed number.
Step-9: Print each digit in words using the array just created.
Step-10: End
Solution
import java.util.*;
public class bank
{
 public static void main(String args[])
throws InputMismatchException{
Scanner scan=new Scanner(System.in);
int amt;
System.out.print("Enter a five-digit amount : ");
amt=scan.nextInt();
if(amt>99999){
System.out.println("INVALID AMOUNT.");}
else{
int a[]={1000,500,100,50,20,10,5,2,1};int i,p,r,b,t,count=0,x;
p=amt;
    x=amt;
       String ones[]={"one","two","three","four","five",
  "six","seven","eight","nine"};
    r=0;
 while(p>0){
  r=r*10+p%10;
  p/=10;
  }
  while(r>0){
 b=r%10;
System.out.print(ones[b-1].toUpperCase()+" ");
r/=10;
}
System.out.println();
 for(i=0;i< a.length;i++){
   t=amt/a[i];
if(t!=0){
System.out.println(a[i]+"X"+t+"="+(t*a[i]));
amt=amt%a[i];
count=count+t;
}}
System.out.println("Number of notes:"+count);
System.out.println("Total amount:"+x);
  }}
}


Question :

Write a program to enter a sentence and print it in ascending order of its word lengths.
A sentence may either terminate with a   period (.).................................................
Algorithm

Step-1: Enter a string
Step-2: Find the length of the string
Step-3: Create a string array
Step-4: Run a loop ‘i’ to access the string
Step-5: Extract word from the string and store it in the string array
Step-6: Continue the process until all the words are stored in the array
Step-7: Now run a loop to access the array
Step-8: Run two loops for sorting, say i and j
Step-9: If length of the ith element is greater than the length of the jth element swap them.
Step-10: Continue the process till the entire array is sorted
Step-11: Display the words in the array along with a blank space
Step-12: End

Solution

import java.io.*;
public class sorting
{
   public static void main()throws IOException
    {
    BufferedReader br=new BufferedReader(
            new InputStreamReader(System.in));
    System.out.println("Enter the string : ");
    String str=br.readLine();
    int l=str.length();
    String a[]=new String[l];
     int p=0,x=0,i,j;
     String t;
     for(i=0;i< l;i++)
     {
     char ch=str.charAt(i);
     if(ch==' '||ch=='.')
     {
     a[x]=str.substring(p,i);
     System.out.print(a[x]+" ");
     x++;
     p=i+1;
     }
     }
System.out.println();
      for(i=0;i< x;i++)
     {
     for(j=0;j< x-i-1;j++)
     {
 if(a[j].length() > a[j+1].length())
     {
     t=a[j];
     a[j]=a[j+1];
     a[j+1]=t;
    }
     }
     }
  
     String s=a[0];
     char ch=s.charAt(0);
     System.out.print(Character.toUpperCase(ch));
     System.out.print(s.substring(1));
     for(i=1;i< x;i++)
     {
     System.out.print(" "+a[i]);
     }
     System.out.print(".");
     }}

Question :………………………

import java.util.*;
public class day_date_year
{


public static void main(String args[])
throws InputMismatchException{

Scanner scan=new Scanner(System.in);
System.out.println("ENTER DAY NUMER(>=1 AND <=366) : ");
int day_number=scan.nextInt();
System.out.println("ENTER YEAR(4 DIGIT) : ");
int year=scan.nextInt();
System.out.println("ENTER DATE AFTER(N)(>=1 AND <=100) : ");
int n=scan.nextInt();

if(day_number<1 || day_number>366)
System.out.println("INVALID DAY NUMBER.");
else if(year<1000 || year >9999)
System.out.println("INVALID YEAR");
else if(n<1 || n>100)
System.out.println("INVALID DATE AFTER VALUE.");
else{

    String month_names[]={"JANUARY", "FEBRUARY","MARCH",
        "APRIL","MAY","JUNE","JULY","AUGUST","SEPTEMBER",
        "OCTOBER","NOVERMBER","DECEMBER"};
    int month_days[]={31,28,31,30,31,30,31,31,30,31,30,31};
    int i, day, month,day_after;
    String suffix;
   
   //IF IT IS A LEAP YEAR FEBRURAY SHOULD HAVE 29 DAYS
    if(year%400==0 || (year%100!=0 && year%4==0))
        month_days[1]=29;
       
        i=0;
   //FIND THE DATE CORRESPONDING TO THE DAY NUMBER
        day=day_number;
        while(day>month_days[i])
        {
            day-=month_days[i];
            i++;
        }
        month=i;
        //ADD SUFFIX AS PER THE DAY
        if(day%10==1 && day/10!=1)
            suffix="ST";
        else if(day%10==2 && day/10!=1)
            suffix="ND";
        else if(day%10==3 && day/10!=1)
            suffix="RD";
        else
            suffix="TH";
        System.out.println("OUTPUT:");
        //FIRST PART OF THE OUTPUT
        System.out.println(day+suffix+" "+
        month_names[month]+" "+year);
       
        //TO CALCULATE DATE AFTER N DAYS
        day_after=day_number+n;
        i=0;
        while(day_after>month_days[i])
        {
            day_after-=month_days[i];
            i++;
            if(i==12){
            i=0;
            year++;
            if(year%400==0 || (year%100!=0 && year%4==0))
                month_days[1]=29;
            }
        }
        day=day_after;
        month=i;
        //ADD SUFFIX AS PER THE DAY
        if(day%10==1 && day/10!=1)
            suffix="ST";
        else if(day%10==2 && day/10!=1)
            suffix="ND";
        else if(day%10==3 && day/10!=1)
            suffix="RD";
        else
            suffix="TH";
       //SECOND PART OF THE OUTPUT
        System.out.println(day+suffix+" "+
        month_names[month]+" "+year);
}
}
}
                              
Question :  mobius Function program.........................

  import java.util.*;
public class mobiusFn
{    int n;
   mobiusFn()
    {
        n = 0;
    }
        void input()
    {
        Scanner sc = new Scanner(System.in);   
        System.out.print("Enter a number : ");
        n = sc.nextInt();
    }
     int primeFac()
    {
        int a=n, i=2, m=0, c=0, f=0;
            
        while(a > 1) // loop to generate prime factors
        {
            c = 0; // variable to store frequency of every prime factor
            while(a%i == 0) // if 'i' is a prime factor
            {
                c++; // counting frequency of 'i'
                f++; // counting no of prime factors
                a=a/i;
            }
                i++;

            if(c > 1) // returning '0' if prime factors are repeated
                return 0;
        }
        return f; // returning no. of prime factors
    }
    
    void display() // function to display value of mobius function
    {
        int mob,x;
        if(n == 1) // condition 1
            mob = 1;
        else
        {
            x = primeFac();
            if(x == 0) // condition 2
                mob = 0;
            else // condition 3
                mob = (int)Math.pow(-1,x);
        }
        System.out.println("Value of Mobius Function : "+mob);
    }
    
    public static void main(String args[])
    {
        mobiusFn ob = new mobiusFn();    
        ob.input();
        ob.display();    
    }}
Question :palindrome program……………………….
import java.math.BigInteger;
import java.util.Scanner;
public class palindrome
{
  public static void main(String[] args) {
        int step = 0;                                
        BigInteger num1, num2, sum;                 
        String original, reverse, str1, str2;
        Scanner in = new Scanner(System.in);
        System.out.println("Please enter an integer");
        original = in.nextLine();
        while (!isNumeric(original)) {
            System.out.println("Please enter an integer");
            original = in.nextLine();
        }

       
        str1 = original;
        reverse = str2 = reverseString(original);

     
        while (!(isPalindrome(str1, str2))) {
            num1 = new BigInteger(str1);
            num2 = new BigInteger(str2);
            sum = num1.add(num2);
            step++;
            if (step > 10000) {
                System.out.print(original + " is a Lychrel numbers");
                break;
            }
            str1 = String.valueOf(sum);
            reverse = str2 = reverseString(str1);
        }

        // Otherwise the Lychrel number would also print like a palindrome
        if (isPalindrome(reverse, reverseString(reverse))) {
            System.out.print(original + " gets palindromic after " + step + " steps: " + reverse);
        }
    }

  
    public static boolean isNumeric(String str) {
        for (char c : str.toCharArray()) {
            if (!Character.isDigit(c)) return false;
        }
        return true;
    }

    /*
    * Go through the whole string
    * add the last character to an empty string
    * you get the reversed
    * */
    public static String reverseString(String str) {
        String reverse = "";

        int length = str.length();

        for (int i = length - 1; i >= 0; i--)
            reverse = reverse + str.charAt(i);
        return reverse;
    }
  // If they are same they are Palindrome
    public static boolean isPalindrome(String orig, String rev) {
        return (orig.equals(rev)); }}
To be continued...................................