कभी पता होगा या हिंदी फिल्मों में देखा होगा सोने की तस्करी जिसमे बाहर से आने वाले सोने पर टैक्स बचाने हेतु बॉम्बे के डॉक यार्ड पर लूट या चोरी होती थी । बहुत सा सोना कस्टम विभाग के हाथ लगता था जो कि सरकारी खजाने में जाता था जिसका विसर्जन कांग्रेस के द्वारा 1993 में कर्ज उठाने के वक्त कर दिया गया था जो कि आज तक वापस नहीं आया।
उसी प्रकार सर्राफ धड्ड्ले से बिना पक्की रसीद के करोड़ो का सोना बेचते आ रहे थे और खरीदने के साथ साथ बेचने वाला टैक्स बचाकर मस्त रहता था ।
लेकिन जब टैक्स की चोरी पर आज की सरकार द्वारा कदम उठाया गया कि 2 लाख का सोना खरीदने वाले को बस पैन कार्ड दिखाना होगा तो सर्राफ समझ गए कि अब खरीदेंगे क्या और बेचेंगे क्या ?
अब जो तस्करी खुले आम हो रही थी जो कि पहले बॉम्बे डॉक्स पर चुप चाप होती थी वो तो रुक गई ।
ये हाल है अगर कोई अच्छा करे हिन्दुस्तान में तो वो भी बदनाम और बुरा करने वाला तो विरोध में खड़ा हो ही जाता है अच्छा करने वालों के।
अगर किसी के काम की आलोचना कर सकते हो तो उसे सराहना भी सीखो।
मैं जेटली जी के इस कदम का स्वागत करता हूँ बाकी सर्राफ समझ जाएं मीडिया भारत माता की जय के चक्कर में आपकी आवाज दबा दी और विरोधियों को सर्राफीयों को डिफेंड करने का कोई रास्ता भी नहीं सूझ रहा है।
नायक मूवी की तरह अगले 3 साल टैक्स पूरा दो , मत बचाओ आने वाले समय में वही आपको आपका विकास दिखाएगा।
बाकी मोदी सरकार से एक गुहार कि सोने पर सब्सिडी न स्टार्ट कर देना ।
और हाँ जो मोदी को सिर्फ फेंकू कहते है उनसे ये कहता हूँ .....भई इस तरह कोई भी फेंके मुझे कोई आपत्ति नहीं .....काश कोई और भी इस तरह की चीजें फेंके .....
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